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Showing posts from July, 2025

महाराज श्री प्रेमानंद जी के विरोध में पाखंड

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संत प्रेमानंद जी महाराज  गुरूदेव का तो कुछ नहीं बिगाड़ना है! आकाश में थूंकोगे तो गंदे खुद ही होंगे  आईना तोड़ने से चेहरा नहीं बदलता महाराज प्रेमानंद जी ने वो कहा जो कोई नहीं कहता। उन्होंने समाज को एक आईना दिखाया, और अब उस आईने को तोड़ने की कोशिश हो रही है। पर याद रखिए — आईना तोड़ने से चेहरा नहीं बदलता। 1. सच्चाई से वही तिलमिलाए जिनको महाराज जी का वक्तव्य गाली जैसा लगा महाराज श्री प्रेमानंद जी ने हाल ही में युवाओं के नैतिक पतन पर जो वक्तव्य दिया, उससे वही लोग तिलमिलाए जिन्हें सच्चाई चुभ गई। उन्होंने कहा कि आज के लड़के-लड़कियाँ पवित्र नहीं हैं, क्योंकि वे बहु-संबंधों में लिप्त हैं और सिर्फ देह के आकर्षण में उलझे हैं 👉 इसलिए घर टूट रहे हैं। अब सोचिए — क्या उन्होंने कोई झूठ कहा? क्या कोई सच्चा संत या महापुरुष ये कहेगा कि " बहु-संबंध ठीक हैं" ? नहीं! कभी नहीं। चाहे कोई वेश्या हो, या कोई साधु — हर कोई जानता है कि ऐसा आचरण अधर्म है। लेकिन जब कोई खुद कीचड़ में लथपथ होता है, तब वो कीचड़ को ही धर्म बताने की कोशिश करता है। अब वही लोग जो खुद अपने आचरण से शर्मिंदा होने चाहिए, मह...

🟥 Operation सिंदूर चर्चा - विपक्ष के बहके सवाल

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  🗣 विपक्ष के सवाल 1. अखिलेश यादव: "चर्चा के दिन ही क्यों मारे गए आतंकी? 2. मल्लिकार्जुन खड़गे: "पहलगाम हमले की जिम्मेदारी कौन लेगा? इस्तीफा देना चाहिए!" 3. राहुल गांधी: "ट्रम्प के दबाव में हुआ सीज़फायर!" सारे सवाल एक बात साफ करते हैं— विपक्ष BJP के रणनीतिक जाल में फंस रहा है। BJP ने इन सवालों का जवाब न केवल संसद में, बल्कि जनता के बीच भी प्रभावी ढंग से दिया है। 🧠 कॉमनसेंस क्या कहता है? 🟩 सवाल 1: चर्चा के दिन ही क्यों मारे आतंकी? हो सकता है कि सरकार ने रणनीतिक रूप से आतंकियों को उसी दिन मार गिराया हो जब "Operation सिंदूर" संसद में चर्चा में था — ताकि देश को रणनीतिक संदेश दिया जा सके ।  हो सकता है इससे सरकार को राजनीतिक फायदा मिला हो पर देश का भी तो फायदा हुआ ना! आतंकियों को मारा गया — यह तथ्य है पर क्या अब तक आतंकी वही थे और सेना ने आज के दिन के लिए बचाए रखा था? यह पूछना कि क्यों उसी दिन मारा? — ये ऐसा है जैसे पूछना कि " दुश्मन को आज क्यों हराया?" ये बिल्कुल तर्कपूर्ण नहीं है।  🟩 सवाल 2: कौन जिम्मेदार? इस्तीफा दो! जब हम श्रीमद्भगवद्गी...

मनसादेवी में 6 लोगों की मौत: हम जनसंख्या विस्फोट के उस मुकाम पर, जहाँ हर व्यवस्था विफल !

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👉 कुल भगदड़ में मौतें 70 से ज़्यादा, सिर्फ 2025 में।  मंसा देवी का हादसा केवल एक मंदिर हादसा नहीं था। यह एक सामाजिक चेतावनी है — कि हम अपनी संख्या पर काबू पाने में विफल हो रहे हैं और इसके चलते हर व्यवस्था असफल होती जा रही है। हरिद्वार के मांसा देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच मची भगदड़ – 6 की मौत, दर्जनों घायल 🧩 किसे दोष दें? प्रशासन, मंदिर ट्रस्ट, पुलिस या बढ़ती जनसंख्या को? जब ऐसी घटनाएं होती हैं तो हम अक्सर सरकार, पुलिस या मंदिर प्रबंधन को जिम्मेदार मान लेते हैं। हाँ, अगर प्रशासन थोड़ा और सतर्क होता तो शायद यह घटना रोकी जा सकती थी। लेकिन क्या सिर्फ प्रशासन ही जिम्मेदार है? हर धार्मिक स्थल, अस्पताल, स्कूल और ट्रेन में हर जगह भीड़ ही भीड़ है। किस हद तक कोई भी व्यवस्था इस जनसैलाब को संभाल पाएगी? इसलिए अब हमें यह सोचना होगा कि क्या बढ़ती जनसंख्या भी इस तरह की घटनाओं के लिए जिम्मेदार है? कितनी तेज़ी से बढ़ रही है जनसंख्या? भारत की आबादी 2025 में 143 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। हर साल लाखों नए लोग जुड़ रहे हैं। शहरों में भीड़, जाम, बेरोजगारी और संसाधनों की कमी इसका साफ असर ...

🇮🇳 क्यों अहम रहा मोदी जी का UK दौरा 2025? | भारत-ब्रिटेन संबंधों का नया अध्याय

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  🧭 1. दौरे की पृष्ठभूमि – दो दिन, कई समझौते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23–24 जुलाई 2025 को ब्रिटेन का आधिकारिक दौरा किया। ये दौरा खास इसलिए था क्योंकि यह ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के साथ उनकी पहली सीधी मुलाकात थी। इस दौरे में Free Trade Agreement (FTA) पर हस्ताक्षर, Vision 2035 रणनीति, और भारतीय समुदाय से संवाद मुख्य आकर्षण रहे। 📜 2. भारत-ब्रिटेन Free Trade Agreement (FTA) तीन सालों की बातचीत के बाद आखिरकार भारत और ब्रिटेन के बीच Free Trade Agreement पर समझौता हुआ। 🔹 भारत के 99% निर्यात पर टैरिफ खत्म 🔹 ब्रिटिश कारों और व्हिस्की पर टैरिफ में कमी 🔹 शिक्षा, स्टार्टअप और टेक निवेश में नए रास्ते खुले विश्लेषण: Brexit के बाद ब्रिटेन के लिए यह सबसे बड़ा व्यापारिक समझौता है, और भारत के लिए यूरोपीय मार्केट में एंट्री का गोल्डन गेट। 🌐 3. Vision 2035: रणनीतिक साझेदारी मोदी और स्टारमर ने "India–UK Vision 2035" साझा किया — जिसमें शामिल हैं: ✔️ रक्षा सहयोग ✔️ साइबर सुरक्षा ✔️ जलवायु परिवर्तन ✔️ डिजिटल गवर्नेंस ✔️ उच्च शिक्षा में सहयोग (UK के 25 विश्वविद्यालयों में भार...

672 जिंदगियां: विमान हादसों का दर्द और समाधान

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रूस में विमान हादसा: दुर्भाग्य से कोई जीवित नहीं बचा आज 24 जुलाई 2025 को रूस के अमूर क्षेत्र में अंगारा एयरलाइंस का An-24 विमान, जिसमें करीब 40-43 यात्री और 6 क्रू मेंबर सवार थे, टायन्डा हवाई अड्डे के पास लैंडिंग के दौरान रडार से गायब हो गया। मलबा 15 किलोमीटर दूर एक ढलान पर मिला, और दुखद रूप से कोई जीवित नहीं बचा। यह हादसा एक बार फिर सवाल उठाता है: आखिर हवाई हादसों की संख्या क्यों बढ़ रही है? क्या ये रोके जा सकते हैं? आइए, इस साल के प्रमुख हादसों पर नजर डालें और समाधान खोजें। 2024-2025 के बड़े विमान हादसे भारत (12 जून 2025): अहमदाबाद में एयर इंडिया की फ्लाइट AI 171 क्रैश हुई, जिसमें 242 लोग सवार थे। नेपाल (24 जुलाई 2024): सौर्या एयरलाइंस का विमान टेकऑफ के दौरान क्रैश हुआ। गलत स्पीड सेटिंग और नियमों की अनदेखी से 19 में से 18 लोग मारे गए। रूस (24 जनवरी 2024): इल्युशिन Il-76 विमान बेलगोरोड में गिरा, जिसमें 65 यूक्रेनी युद्धबंदी मारे गए। रूस ने इसे यूक्रेन की मिसाइल का हमला बताया। ब्राजील (9 अगस्त 2024): वोएपास फ्लाइट 2283 साओ पाउलो में क्रैश हुई, 62 लोगों की मौत हुई। कजाकिस्...

क्यों इस्तीफा दिया उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने

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समाचार - जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को भारत के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति के पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे में स्वास्थ्य कारणों को मुख्य वजह बताया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित पत्र में उन्होंने लिखा कि चिकित्सा सलाह का पालन करने और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए वे संविधान के अनुच्छेद 67(क) के तहत तत्काल प्रभाव से पद छोड़ रहे हैं। इस साल मार्च में उनकी दिल्ली के एम्स में एंजियोप्लास्टी हुई थी, और वे हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। कार्यकाल पूरा नहीं करने वाले सातवें उपराष्ट्रपति बनें जगदीप धनखड़! चुनावी सम्मत के कारण उठते सवाल- उपराष्ट्रपति उसी दिन संसद के मानसून सत्र में सक्रिय थे और कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या नहीं दिखाई दी थी। कुछ विपक्षी नेताओं, जैसे जयराम रमेश और कपिल सिब्बल, ने संदेह जताया कि स्वास्थ्य के अलावा अन्य कारण, जैसे राजनीतिक दबाव, भी इस्तीफे की वजह हो सकते हैं। कुछ एक्स पोस्ट्स में भी दावा किया गया कि सुप्रीम कोर्ट पर उनकी टिप्पणियों या विपक्ष के साथ टकराव के कारण दबाव हो सकता है, लेकिन ये दावे पुष्ट नहीं हैं। सुप्रीम ...

शिवराज सिंह चौहान अपनी पत्नी साधना सिंह को भूल गए और निकल लिए

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हमारे पूर्व मुख्यमंत्री व केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान बहुत ही भोले हैं! एक हालिया घटना में, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी पत्नी साधना सिंह को गुजरात के जूनागढ़ में एक कार्यक्रम के बाद भूल गए थे। यह घटना तब हुई जब वे शनिवार को मूंगफली शोध केंद्र में एक कार्यक्रम में भाग लेने के बाद 22 गाड़ियों के काफिले के साथ राजकोट के लिए रवाना हो गए। लगभग एक किलोमीटर का सफर तय करने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि उनकी पत्नी उनके साथ नहीं हैं। इसके बाद उन्होंने तुरंत काफिला वापस मूंगफली शोध केंद्र की ओर मोड़ा, जहां साधना सिंह प्रतीक्षालय में इंतज़ार कर रही थीं। हालांकि, इस घटना का जूनागढ़ की किसी मस्जिद (जुमागढ़) से कोई संबंध नहीं है। यह गलती जल्दबाजी में हुई, क्योंकि शिवराज सिंह को राजकोट से फ्लाइट पकड़नी थी। इस घटना ने सोशल मीडिया और समाचारों में काफी ध्यान आकर्षित किया और इसे एक हल्के-फुल्के अंदाज में लिया गया। कार्यक्रम खत्म होने के बाद शिवराज सिंह को जल्दी में राजकोट हवाई अड्डे के लिए निकलना था, क्योंकि उन्हें एक फ्लाइट पकड़नी थी। वे 22 गाड़ियों के ...

जापान भारत से 1.6 करोड़ गुना तेज़ इंटरनेट: तकनीकी क्रांति में हम कहाँ खड़े हैं?

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जापान ने इंटरनेट स्पीड का नया विश्व रिकॉर्ड कायम किया है, जो 1.02 पेटाबिट्स प्रति सेकंड (Pbps) यानी 10.20 लाख गीगाबिट्स प्रति सेकंड (Gbps) है। यह भारत की औसत इंटरनेट स्पीड (63.55 Mbps) से 1.6 करोड़ गुना तेज़ है । इस स्पीड से आप नेटफ्लिक्स की पूरी लाइब्रेरी या 10,000 4K मूवीज़ को एक सेकंड से भी कम समय में डाउनलोड कर सकते हैं। भारत में डिजिटल इंडिया और 5G की बातें तो हो रही हैं, लेकिन जापान की यह उपलब्धि हमें अपनी नीतियों और प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करती है।   सरकार का तकनीकी सशक्तिकरण में क्या रोल होता है? सरकार का तकनीकी सशक्तिकरण में मुख्य रोल नीति निर्माण, निवेश, और बुनियादी ढांचे के विकास में होता है। जापान में सरकार ने National Institute of Information and Communications Technology (NICT) को फंडिंग और रिसर्च के लिए समर्थन दिया, जिसके परिणामस्वरूप यह रिकॉर्ड बना। भारत में सरकार ने डिजिटल इंडिया, भारतनेट, और 5G रोलआउट जैसी योजनाएँ शुरू की हैं, लेकिन इनका कार्यान्वयन धीमा है। भ्रष्टाचार, नौकरशाही, और संसाधनों का गलत उपयोग इन योजनाओं की प्रगति मे...

मुफ्त बिजली या चुनावी रिश्वत? जनता से खेल या कल्याण का दावा? सत्ता की साजिश

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क्या ये रिश्वत नहीं? चुनाव से पहले मुफ्त बिजली की लुभावनी योजना बिहार में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, नीतीश कुमार की सरकार ने 1 अगस्त 2025 से सभी घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा की है। यह योजना करीब 1.67 करोड़ परिवारों को लाभ पहुंचाएगी, खासकर निम्न और मध्यम वर्ग को। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह लुभावनी योजना वोट जुटाने की रणनीति तो नहीं? क्या वाकई यह कल्याणकारी राजनीति है या तंत्र का निजी इस्तेमाल? चुनाव से ठीक पहले की ‘दरियादिली’ –क्या जीत की साजिश? आख़िर क्यों हर सरकार को जनता की याद सिर्फ़ चुनावों से ठीक पहले आती है? क्यों 5 साल तक महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से जूझती जनता को चुनाव के समय ही रेवड़ियों की झड़ी मिलने लगती है? कुछ उदाहरण जो आदर्श राजनीति से मेल नहीं खाते: 1. दिल्ली: मुफ्त बिजली – केजरीवाल मॉडल चुनाव से पहले सबको मुफ्त बिजली देने का वादा। नतीजा – राजकोष पर बोझ और राज्य का घाटा बढ़ता चला गया। 2. मध्यप्रदेश: लाड़ली बहना योजना – शिवराज मॉडल चुनाव से पहले महिलाओं को हर महीने ₹1000 देने का ऐलान। सवाल ये कि 18 साल तक इन महिलाओं की स्थ...

तेलुगु हमारी माँ और हिंदी पेदम्मा ( बड़ी मां)- पवन कल्याण

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दक्षिण से राष्ट्रीय एकता के लिए पवन कल्याण की  एक सकारात्मक पहल हैदराबाद में 11 जुलाई 2025 को राजभाषा विभाग के स्वर्णोत्सव समारोह में जनसेना पार्टी के नेता और आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने एक सकारात्मक संदेश दिया। उन्होंने कहा, “ तेलुगु हमारी माँ है, और हिंदी हमारी पेदम्मा (बड़ी माँ) जैसी है।” इस बयान के जरिए उन्होंने हिंदी को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए इसके महत्व को रेखांकित किया और कहा कि हिंदी सीखने से करियर और व्यवसाय, खासकर फिल्म उद्योग में अवसर बढ़ते हैं।  पवन कल्याण का बयान इस माहौल में एक ताज़ा हवा का झोंका है, जो एकता की बात करता है। हम एक ओर अखंड भारत का सपना देख रहे हैं - जब कुछ नेता सत्ता के लिए देश को बांटने की कोशिश करते हैं, पवन कल्याण जैसे नेता एकता का संदेश दे रहे हैं। यह समय है कि हम ऐसे नेताओं का समर्थन करें जो देश को जोड़ें , न कि तोड़ें। हिंदी और तेलुगु के बीच का यह संदेश केवल भाषा का नहीं, बल्कि मन को जोड़ने का है। हमारा देश एक है हम एक ओर अखंड भारत का सपना देख रहे हैं दूसरी ओर एसी बातें मनोबल को कमजोर करती है। केवल राजन...