मुफ्त बिजली या चुनावी रिश्वत? जनता से खेल या कल्याण का दावा? सत्ता की साजिश
क्या ये रिश्वत नहीं? चुनाव से पहले मुफ्त बिजली की लुभावनी योजना बिहार में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, नीतीश कुमार की सरकार ने 1 अगस्त 2025 से सभी घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा की है। यह योजना करीब 1.67 करोड़ परिवारों को लाभ पहुंचाएगी, खासकर निम्न और मध्यम वर्ग को। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह लुभावनी योजना वोट जुटाने की रणनीति तो नहीं? क्या वाकई यह कल्याणकारी राजनीति है या तंत्र का निजी इस्तेमाल? चुनाव से ठीक पहले की ‘दरियादिली’ –क्या जीत की साजिश? आख़िर क्यों हर सरकार को जनता की याद सिर्फ़ चुनावों से ठीक पहले आती है? क्यों 5 साल तक महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से जूझती जनता को चुनाव के समय ही रेवड़ियों की झड़ी मिलने लगती है? कुछ उदाहरण जो आदर्श राजनीति से मेल नहीं खाते: 1. दिल्ली: मुफ्त बिजली – केजरीवाल मॉडल चुनाव से पहले सबको मुफ्त बिजली देने का वादा। नतीजा – राजकोष पर बोझ और राज्य का घाटा बढ़ता चला गया। 2. मध्यप्रदेश: लाड़ली बहना योजना – शिवराज मॉडल चुनाव से पहले महिलाओं को हर महीने ₹1000 देने का ऐलान। सवाल ये कि 18 साल तक इन महिलाओं की स्थ...