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🟥 Operation सिंदूर चर्चा - विपक्ष के बहके सवाल

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  🗣 विपक्ष के सवाल 1. अखिलेश यादव: "चर्चा के दिन ही क्यों मारे गए आतंकी? 2. मल्लिकार्जुन खड़गे: "पहलगाम हमले की जिम्मेदारी कौन लेगा? इस्तीफा देना चाहिए!" 3. राहुल गांधी: "ट्रम्प के दबाव में हुआ सीज़फायर!" सारे सवाल एक बात साफ करते हैं— विपक्ष BJP के रणनीतिक जाल में फंस रहा है। BJP ने इन सवालों का जवाब न केवल संसद में, बल्कि जनता के बीच भी प्रभावी ढंग से दिया है। 🧠 कॉमनसेंस क्या कहता है? 🟩 सवाल 1: चर्चा के दिन ही क्यों मारे आतंकी? हो सकता है कि सरकार ने रणनीतिक रूप से आतंकियों को उसी दिन मार गिराया हो जब "Operation सिंदूर" संसद में चर्चा में था — ताकि देश को रणनीतिक संदेश दिया जा सके ।  हो सकता है इससे सरकार को राजनीतिक फायदा मिला हो पर देश का भी तो फायदा हुआ ना! आतंकियों को मारा गया — यह तथ्य है पर क्या अब तक आतंकी वही थे और सेना ने आज के दिन के लिए बचाए रखा था? यह पूछना कि क्यों उसी दिन मारा? — ये ऐसा है जैसे पूछना कि " दुश्मन को आज क्यों हराया?" ये बिल्कुल तर्कपूर्ण नहीं है।  🟩 सवाल 2: कौन जिम्मेदार? इस्तीफा दो! जब हम श्रीमद्भगवद्गी...

मनसादेवी में 6 लोगों की मौत: हम जनसंख्या विस्फोट के उस मुकाम पर, जहाँ हर व्यवस्था विफल !

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👉 कुल भगदड़ में मौतें 70 से ज़्यादा, सिर्फ 2025 में।  मंसा देवी का हादसा केवल एक मंदिर हादसा नहीं था। यह एक सामाजिक चेतावनी है — कि हम अपनी संख्या पर काबू पाने में विफल हो रहे हैं और इसके चलते हर व्यवस्था असफल होती जा रही है। हरिद्वार के मांसा देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच मची भगदड़ – 6 की मौत, दर्जनों घायल 🧩 किसे दोष दें? प्रशासन, मंदिर ट्रस्ट, पुलिस या बढ़ती जनसंख्या को? जब ऐसी घटनाएं होती हैं तो हम अक्सर सरकार, पुलिस या मंदिर प्रबंधन को जिम्मेदार मान लेते हैं। हाँ, अगर प्रशासन थोड़ा और सतर्क होता तो शायद यह घटना रोकी जा सकती थी। लेकिन क्या सिर्फ प्रशासन ही जिम्मेदार है? हर धार्मिक स्थल, अस्पताल, स्कूल और ट्रेन में हर जगह भीड़ ही भीड़ है। किस हद तक कोई भी व्यवस्था इस जनसैलाब को संभाल पाएगी? इसलिए अब हमें यह सोचना होगा कि क्या बढ़ती जनसंख्या भी इस तरह की घटनाओं के लिए जिम्मेदार है? कितनी तेज़ी से बढ़ रही है जनसंख्या? भारत की आबादी 2025 में 143 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। हर साल लाखों नए लोग जुड़ रहे हैं। शहरों में भीड़, जाम, बेरोजगारी और संसाधनों की कमी इसका साफ असर ...

क्यों इस्तीफा दिया उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने

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समाचार - जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को भारत के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति के पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे में स्वास्थ्य कारणों को मुख्य वजह बताया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित पत्र में उन्होंने लिखा कि चिकित्सा सलाह का पालन करने और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए वे संविधान के अनुच्छेद 67(क) के तहत तत्काल प्रभाव से पद छोड़ रहे हैं। इस साल मार्च में उनकी दिल्ली के एम्स में एंजियोप्लास्टी हुई थी, और वे हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। कार्यकाल पूरा नहीं करने वाले सातवें उपराष्ट्रपति बनें जगदीप धनखड़! चुनावी सम्मत के कारण उठते सवाल- उपराष्ट्रपति उसी दिन संसद के मानसून सत्र में सक्रिय थे और कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या नहीं दिखाई दी थी। कुछ विपक्षी नेताओं, जैसे जयराम रमेश और कपिल सिब्बल, ने संदेह जताया कि स्वास्थ्य के अलावा अन्य कारण, जैसे राजनीतिक दबाव, भी इस्तीफे की वजह हो सकते हैं। कुछ एक्स पोस्ट्स में भी दावा किया गया कि सुप्रीम कोर्ट पर उनकी टिप्पणियों या विपक्ष के साथ टकराव के कारण दबाव हो सकता है, लेकिन ये दावे पुष्ट नहीं हैं। सुप्रीम ...

जापान भारत से 1.6 करोड़ गुना तेज़ इंटरनेट: तकनीकी क्रांति में हम कहाँ खड़े हैं?

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जापान ने इंटरनेट स्पीड का नया विश्व रिकॉर्ड कायम किया है, जो 1.02 पेटाबिट्स प्रति सेकंड (Pbps) यानी 10.20 लाख गीगाबिट्स प्रति सेकंड (Gbps) है। यह भारत की औसत इंटरनेट स्पीड (63.55 Mbps) से 1.6 करोड़ गुना तेज़ है । इस स्पीड से आप नेटफ्लिक्स की पूरी लाइब्रेरी या 10,000 4K मूवीज़ को एक सेकंड से भी कम समय में डाउनलोड कर सकते हैं। भारत में डिजिटल इंडिया और 5G की बातें तो हो रही हैं, लेकिन जापान की यह उपलब्धि हमें अपनी नीतियों और प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करती है।   सरकार का तकनीकी सशक्तिकरण में क्या रोल होता है? सरकार का तकनीकी सशक्तिकरण में मुख्य रोल नीति निर्माण, निवेश, और बुनियादी ढांचे के विकास में होता है। जापान में सरकार ने National Institute of Information and Communications Technology (NICT) को फंडिंग और रिसर्च के लिए समर्थन दिया, जिसके परिणामस्वरूप यह रिकॉर्ड बना। भारत में सरकार ने डिजिटल इंडिया, भारतनेट, और 5G रोलआउट जैसी योजनाएँ शुरू की हैं, लेकिन इनका कार्यान्वयन धीमा है। भ्रष्टाचार, नौकरशाही, और संसाधनों का गलत उपयोग इन योजनाओं की प्रगति मे...

तेलुगु हमारी माँ और हिंदी पेदम्मा ( बड़ी मां)- पवन कल्याण

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दक्षिण से राष्ट्रीय एकता के लिए पवन कल्याण की  एक सकारात्मक पहल हैदराबाद में 11 जुलाई 2025 को राजभाषा विभाग के स्वर्णोत्सव समारोह में जनसेना पार्टी के नेता और आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने एक सकारात्मक संदेश दिया। उन्होंने कहा, “ तेलुगु हमारी माँ है, और हिंदी हमारी पेदम्मा (बड़ी माँ) जैसी है।” इस बयान के जरिए उन्होंने हिंदी को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए इसके महत्व को रेखांकित किया और कहा कि हिंदी सीखने से करियर और व्यवसाय, खासकर फिल्म उद्योग में अवसर बढ़ते हैं।  पवन कल्याण का बयान इस माहौल में एक ताज़ा हवा का झोंका है, जो एकता की बात करता है। हम एक ओर अखंड भारत का सपना देख रहे हैं - जब कुछ नेता सत्ता के लिए देश को बांटने की कोशिश करते हैं, पवन कल्याण जैसे नेता एकता का संदेश दे रहे हैं। यह समय है कि हम ऐसे नेताओं का समर्थन करें जो देश को जोड़ें , न कि तोड़ें। हिंदी और तेलुगु के बीच का यह संदेश केवल भाषा का नहीं, बल्कि मन को जोड़ने का है। हमारा देश एक है हम एक ओर अखंड भारत का सपना देख रहे हैं दूसरी ओर एसी बातें मनोबल को कमजोर करती है। केवल राजन...