तेलुगु हमारी माँ और हिंदी पेदम्मा ( बड़ी मां)- पवन कल्याण

दक्षिण से राष्ट्रीय एकता के लिए पवन कल्याण की
 एक सकारात्मक पहल
हैदराबाद में 11 जुलाई 2025 को राजभाषा विभाग के स्वर्णोत्सव समारोह में जनसेना पार्टी के नेता और आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने एक सकारात्मक संदेश दिया। उन्होंने कहा, “तेलुगु हमारी माँ है, और हिंदी हमारी पेदम्मा (बड़ी माँ) जैसी है।” इस बयान के जरिए उन्होंने हिंदी को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए इसके महत्व को रेखांकित किया और कहा कि हिंदी सीखने से करियर और व्यवसाय, खासकर फिल्म उद्योग में अवसर बढ़ते हैं। 
पवन कल्याण का बयान इस माहौल में एक ताज़ा हवा का झोंका है, जो एकता की बात करता है।
हम एक ओर अखंड भारत का सपना देख रहे हैं -
जब कुछ नेता सत्ता के लिए देश को बांटने की कोशिश करते हैं, पवन कल्याण जैसे नेता एकता का संदेश दे रहे हैं। यह समय है कि हम ऐसे नेताओं का समर्थन करें जो देश को जोड़ें, न कि तोड़ें। हिंदी और तेलुगु के बीच का यह संदेश केवल भाषा का नहीं, बल्कि मन को जोड़ने का है।
हमारा देश एक है हम एक ओर अखंड भारत का सपना देख रहे हैं दूसरी ओर एसी बातें मनोबल को कमजोर करती है।

केवल राजनीति के लिए देश तोड़ने की बातें 
सत्ता के लोभी राजनीति में अक्सर क्षेत्रीयता और भाषाई अस्मिता को उछालकर वोट बैंक बनाते हैं। 
कुछ नेता राष्ट्रीय एकता को कमजोर करने वाली बातें करते हैं, जो देश के लिए शर्मनाक है। 
ये नेता केवल सत्ता के लिए ऐसी नीति अपनाते हैं, जो समाज को बांटने का काम करती है। 


 समाज का कोई वर्ग इसे समर्थन भी देता है, जो राष्ट्रीय शर्म का विषय है।
ये एकात्म विरोधी तत्व हर तरह से देश को कमजोर करने की कोशिश करते हैं। चाहे वह भाषा, संस्कृति या क्षेत्र के नाम पर बंटवारा हो, इनका मकसद सत्ता हासिल करना होता है। दुखद यह है कि ऐसे नेताओं को समाज का एक वर्ग समर्थन भी देता है, जो राष्ट्रीय शर्म का विषय है।



विपक्ष का सत्ता के लिए बौखलाहट 
विपक्षी दलों की सत्ता की भूख ने हाल ही में कुछ हैरान करने वाले गठबंधन बनाए हैं। 22 साल बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का एक मंच पर आना, साथ ही इंडिया और इंडी गठबंधन का बनना, यह दर्शाता है कि सत्ता के लिए वैचारिक विरोध भुलाए जा रहे हैं। यह केवल सत्ता की राजनीति का परिणाम है, न कि देशहित का।


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