विभाजन विभीषिका दिवस – एक जख्म जो आज भी हरा है
माँ जैसे देश के टुकड़े सहना असंभव-सा था – विभाजन विभीषिका दिवस 2025 “जिन्होंने 1947 का विभाजन देखा, उनके दिल में आज भी लहू टपकता है, और जिन्होंने नहीं देखा, वे भी इसके जख्म महसूस करते हैं।” भारत , जिसे हम माँ की तरह पूजते हैं, उसके टुकड़े करना खुद के सीने को चीरने जैसा था। भारतीय संस्कृति में “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” की भावना गहराई से बसी है, जो मातृभूमि को स्वर्ग से भी ऊपर मानती है। फिर भी, धर्म के नाम पर भारत-पाकिस्तान विभाजन कर दिया गया। यह विभाजन सिर्फ भू-भाग का नहीं था, बल्कि दिलों, रिश्तों और आत्माओं का बंटवारा था। पंजाब और बंगाल की गलियों में हिंसा की आग भड़क उठी, दंगों ने लाखों परिवारों को उजाड़ दिया। जो अपने घरों से निकले, वे कभी लौट न पाए। विभाजन में कितने लोग, कितनी ज़मीन और कितना ऐश्वर्य खोया? 1. लोगों का नुकसान अनुमानतः 1 से 2 करोड़ लोग विस्थापित हुए। 2 से 20 लाख लोगों की जान हिंसा, भूख और बीमारियों से गई। हजारों महिलाओं को अपहरण और अत्याचार का सामना करना पड़ा। 2. जमीन का नुकसान भारत का लगभग 30% भू-भाग पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान...