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भावना आहत तब होती है जब हम असमर्थ होते हैं। किसी दुश्मन ने हमें थप्पड़ मार दिया, तो हमें क्रोध आएगा या भावना आहत होगी?

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 दरअसल कौन सी चीज़ भावना आहत करती है? क्या मुसलमानों ने मंदिर तोड़े, या कोई हमारे राम और कृष्ण के बारे में कुछ गलत बोल गया, तो इससे क्या हमारी भावना आहत हो जाती है? यह कौन सी भावना है जो ऐसे आहत होती है? भावना आहत तब होती है जब हम असमर्थ होते हैं। किसी दुश्मन ने हमें थप्पड़ मार दिया, तो हमें क्रोध आएगा या भावना आहत होगी? मुसलमानों ने हमारे मंदिर तोड़े। यह उन्होंने हमारी विरासत और संपत्ति पर हमला किया, हमारी परंपरा पर हमला किया। वे निश्चित ही बड़े क्रूर और आततायी लोग थे। उन्होंने मीना बाज़ार लगवाए, उन्होंने मंदिर तोड़े और मूर्तियों को सीढ़ियों के नीचे दबाया ताकि मुसलमान उन पर पैर रखकर निकलें। यह हमारी भावना पर आक्रमण नहीं था। यह हमारे पौरुष, हमारे स्वाभिमान और हमारी ताकत पर हमला था। हमारी भावना सबसे ज़्यादा आहत होती है कि कोई मंदिर में भगवान की पूजा करता है, राम और कृष्ण की बात करता है। यह दिखाता है कि वह हमारे भगवानों के चरित्र की अद्भुतता को महसूस कर पा रहा है। और वही लोग जब किसी नारी को काम-भावना से देखते हैं, तब भावना आहत होती है। ऐसा व्यक्ति जब किसी बेजुबान जानवर पर द...

देश के हर कोने-कोने में देशभक्त लोग भरे पड़े हैं। पर शासन में बैठे लोग अपने ऊपर आँच न आए, इसलिए उनको दबा देते हैं। मणिपुर की आवाज पूरे देश में फैलने नहीं देते। कई सारे भारत तिवारी मार दिए जाते हैं।

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 अयोग्यों का शासन , हमें बदलाव की जरूरत है { Rule of the Unworthy: Does India Need a Better System of Governance? } दुनिया सदा प्रगति करती है। कोई शक नहीं है कि दुनिया ने प्रगति नहीं की है। लोगों ने जिस गति से हवाई जहाज बनाया, उसी गति से सामाजिक मूल्य भी बनाए और सामाजिक व्यवस्थाएँ भी बनाई। जन-विकास की कड़ी में लोग ऐसे भी हुए जो कमजोरों को दबाया करते थे। यह एक जीव की प्रवृत्ति है। चाहे इंसान हो या जानवर, हर कोई अपने से कमजोर को दबा रहा है, तब से लेकर आज तक। उसी का प्रारूप है कि हमारे यहाँ मुगल, मंगोल से लेकर अंग्रेजों तक ने यहाँ आकर दबाना चाहा और कई हद तक हमें क्षति भी पहुँचाई। पर साथ ही ऐसे लोग भी हुए जिन्होंने अत्याचारियों से लोगों को बचाने के लिए डटकर सामना किया, कुछ सामाजिक नियम-कानून बनाए, कुछ व्यवसाय बनाए। इसी का नतीजा निकलकर आया कि राजा-रजवाड़ों ने जन्म लिया। मुट्ठी भर बुरे लोगों से समाज को बचाने के लिए राजधर्म और राजतंत्र बने। समय-समय पर सामाजिक व्यवस्थाएँ बनीं, बिगड़ीं, फिर नई बनीं। और राजतंत्र बना तो यह बहुत समय तक चला। समय के साथ इसमें भी विक्षेप आ गए, तो कहीं-कहीं ल...

अधिकारी बलि का बकरा, नेता सुरक्षित तर्कों के आईने में इंदौर जल-त्रा सदी

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 अगर अधिकारी दोषी हैं, तो यह मानना पड़ेगा कि जनप्रतिनिधि या तो अयोग्य थे या जानबूझकर चुप थे। दोनों ही स्थिति में वे दोषी बनते हैं। इंदौर में दूषित पानी से लोगों की मौत हुई। यह सिर्फ प्रशासनिक चूक नहीं थी, यह जवाबदेही की सुनियोजित हत्या थी। सरकार ने तुरंत कुछ अधिकारियों को हटाकर और निलंबित करके संदेश दिया कि कार्रवाई हो गई। लेकिन अगर इस पूरे मामले को तर्क की कसौटी पर परखें, तो साफ़ दिखता है कि यह कार्रवाई नहीं, सिर्फ परदा डालने की कोशिश है।   समस्या ज़मीन पर थी, फैसले ऊपर होते हैं गंदा पानी किसी फाइल में नहीं बहता, वह मोहल्लों में, गलियों में और घरों में बहता है। जिस इलाके में पानी दूषित था— वहां का पार्षद रोज़ जाता है, वहीं का विधायक वोट मांगने आता है,  वहीं के नेता मंच से भाषण देते हैं अगर अधिकारी दोषी हैं, तो यह मानना पड़ेगा कि जनप्रतिनिधि या तो अयोग्य थे या जानबूझकर चुप थे। दोनों ही स्थिति में वे दोषी बनते हैं।   शिकायत का पहला दरवाज़ा नेता होता है कोई आम नागरिक सीधे नगर आयुक्त के पास नहीं जाता। वह पहले—  पार्षद को फोन करता है,  विधायक से मिलता है, नेता ...
  अखंड भारत का सपना और विभाजन का घाव यह देश आज इतना बड़ा है क्योंकि कई राजाओं ने, रियासतों ने अपनी 100-100 पीढ़ियों से चली आ रही सत्ता को भारत को अखंड बनाने के लिए पद और राजतंत्र का त्याग किया था। कई नौजवानों ने अपनी जवानी भारत माता को अखंड, सौभाग्यवती बनाने के लिए किए गए हवन में भस्म कर दी। पर उसी समय के सत्ता के लोभी नेताओं ने प्रधानमंत्री का पद पाने की लालसा में देश के टुकड़े कर दिए थे। और कुछ विक्षिप्त ज्ञान के मस्तिष्कों ने मजहब के नाम पर अलग देश की माँग की, क्योंकि यह देश उनका नहीं था। माँ जैसे देश के टुकड़े हुए और वो घाव आजतक हमारा देश महसूस कर रहा है। भारत माता की जय का हर नारा उस घाव पर नमक छिड़क जाता है। वो घाव तो तभी भरेगा जब यह भारत अखंड होगा। पाकिस्तान के वो स्थल जो भारतीय विरासत से जुड़े हैं    लाहौर – मान्यता है कि यह नगर भगवान राम के पुत्र लव ने बसाया। कसूर – कहा जाता है कि इसे राम के पुत्र कुश ने बसाया। कटासराज मंदिर (Katas Raj, पंजाब) – यहाँ की झील भगवान शिव के आंसुओं से बनी मानी जाती है। हिंगलाज माता शक्तिपीठ (बलूचिस्तान) – शक्तिपी...

प्रेमानंद जी हों या रामभद्राचार्य जी, दोनों ही गुरु भगवान के स्वरूप हैं। श्री इन्द्रेश जी की वाणी कीचड़ में खिले कमल की तरह मन को छू गई।

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  गुरु का सम्मान: इन्द्रेश जी उपाध्याय का संदेश हाल ही में प्रेमानंद जी महाराज और जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी को लेकर समाज में अनावश्यक चर्चाएँ और तुलना होने लगीं। जहाँ मीडिया ने अपनी संकिर्ण मानसिकता , अधूरा व स्थूल ज्ञान और TRP की लालसा में इस विषय को लेकर बड़ी कंट्रोवर्सी खड़ी कर दी, वहीं लगातार 3–4 दिनों तक इस मुद्दे को सनसनी की तरह प्रस्तुत किया गया। वृंदावन के एक संत की वाणी कीचड़ में खिले कमल की तरह मन को छू गई। लेकिन ठीक उसी समय वृंदावन के कथावाचक पूज्य श्री इन्द्रेश जी उपाध्याय महाराज ने एक ऐसा गंभीर, गहन और मन को छू लेने वाला संदेश दिया, जिसने विवाद की दिशा ही बदल दी। 🕉️ दोनों गुरु भगवत् स्वरूप हैं किसी भक्त के पूछने पर इन्द्रेश जी ने कहा — “प्रेमानंद जी हों या रामभद्राचार्य जी, दोनों ही गुरु भगवान के स्वरूप हैं। उनमें किसी भी प्रकार की तुलना करना या अंतर ढूँढ़ना गलत है। यह तो भगवान की लीला है, जो गुरु के माध्यम से प्रकट होती है। वे स्वयं श्रीकृष्ण ही विभिन्न रूपों में लीला कर रहे हैं। दोनों गुरु कृष्णस्वरूप हैं — अब उनमें कौन महान है और कौन गलत, इसका न...

130वाँ संविधान संशोधन 🚨 – विपक्ष क्यों डरा?

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  130वाँ संविधान संशोधन विधेयक 2025: राजनीति से अपराधीकरण खत्म करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल 130वाँ संविधान संशोधन विधेयक 2025 लोकसभा में पेश हो चुका है। यह बिल प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को 30 दिन से अधिक हिरासत में रहने पर पद से हटाने का प्रावधान करता है। विपक्ष इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहा है, जबकि समर्थक इसे राजनीति की सफाई की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं। --- Constitution 130th Amendment Bill in Hindi सत्ता की ईमानदारी का परिचय भारत की राजनीति में लंबे समय से अपराध और सत्ता का गठजोड़ सबसे बड़ा सवाल रहा है। ऐसे हालात में 130वाँ संविधान संशोधन विधेयक 2025 को ईमानदारी का परिचय माना जा सकता है। यह साफ संदेश देता है कि सत्ता अपराधियों और भ्रष्ट नेताओं की शरणस्थली नहीं बन सकती। विपक्ष का विरोध और व्यंग्य विधेयक का विरोध विपक्ष ने तीखे अंदाज़ में किया। सदन में हंगामा, कॉपी फाड़ना और यहां तक कि मंत्री पर फेंकना — सब देखने को मिला। लेकिन इस विरोध ने एक व्यंग्यात्मक सवाल भी खड़ा किया — क्या सचमुच राजनीति से अपराधियों को बाहर करने का प्रयास विपक्ष को खटक रहा है? अगर ऐसा है, ...

विभाजन विभीषिका दिवस – एक जख्म जो आज भी हरा है

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माँ जैसे देश के टुकड़े सहना असंभव-सा था – विभाजन विभीषिका दिवस 2025 “जिन्होंने 1947 का विभाजन देखा, उनके दिल में आज भी लहू टपकता है, और जिन्होंने नहीं देखा, वे भी इसके जख्म महसूस करते हैं।” भारत , जिसे हम माँ की तरह पूजते हैं, उसके टुकड़े करना खुद के सीने को चीरने जैसा था। भारतीय संस्कृति में “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” की भावना गहराई से बसी है, जो मातृभूमि को स्वर्ग से भी ऊपर मानती है। फिर भी, धर्म के नाम पर भारत-पाकिस्तान विभाजन कर दिया गया। यह विभाजन सिर्फ भू-भाग का नहीं था, बल्कि दिलों, रिश्तों और आत्माओं का बंटवारा था। पंजाब और बंगाल की गलियों में हिंसा की आग भड़क उठी, दंगों ने लाखों परिवारों को उजाड़ दिया। जो अपने घरों से निकले, वे कभी लौट न पाए। विभाजन में कितने लोग, कितनी ज़मीन और कितना ऐश्वर्य खोया? 1. लोगों का नुकसान अनुमानतः 1 से 2 करोड़ लोग विस्थापित हुए। 2 से 20 लाख लोगों की जान हिंसा, भूख और बीमारियों से गई। हजारों महिलाओं को अपहरण और अत्याचार का सामना करना पड़ा। 2. जमीन का नुकसान भारत का लगभग 30% भू-भाग पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान...

आनंद महिंद्रा का कहना है कि ये टैरिफ बदलाव भारतीय उद्यमियों के लिए एक बड़ा मौका हो सकता है...

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हमें किसी और देश को दोष देने की बजाय अपनी ताकत पर ध्यान देना चाहिए। यह समय भारत के लिए खुद को पहले से ज्यादा शानदार बनाने का है। आनंद महिंद्रा दृष्टिकोण हमें सिखाता है कि  हर मुश्किल में एक मौका छिपा होता है । आज जो टैरिफ की चुनौती सामने है, वह भारत के लिए एक नई शुरुआत का संकेत हो सकती है—अगर हम सही कदम उठाएं। 1991 में भी भारत कठिन समय से गुज़रा था, जब विदेशी मुद्रा का भंडार बेहद कम था और अर्थव्यवस्था संकट में थी। लेकिन बड़े आर्थिक सुधारों—जैसे अर्थव्यवस्था को खोलना और विदेशी निवेश को आकर्षित करना—ने भारत को तेज़ी से तरक्की की राह पर ला खड़ा किया। महिंद्रा का मानना है कि आज का टैरिफ विवाद भी वैसा ही एक मोड़ है, जो भारत की अर्थव्यवस्था को और मजबूत बना सकता है।   Anand Mahindra  अर्थव्यवस्था को बूस्ट देने के उपाय महिंद्रा ने कुछ ऐसे कदम सुझाए हैं जो भारत को वैश्विक स्तर पर लाभ पहुंचा सकते हैं: 1. बिजनेस करना आसान बनाएं भारत में बिजनेस शुरू करना और चलाना अभी भी कई प्रक्रियाओं से गुजरता है। एक प्लेटफ़ॉर्म, जहां सारी परमिशन एक जगह मिल जाए। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच ब...

SSC परीक्षा विवाद - कितनी ही उम्मीदों का गला घोंट दिया आपने, शासन व्यवस्था !

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 लोग पढ़ाई करने में लगभग आधी ज़िंदगी निवेश कर देते हैं, और अगर इसमें उनका भविष्य नहीं बनता है, तो उनकी ज़िंदगी लगभग बर्बाद हो चुकी होती है। ऐसे में लोगों की ज़िंदगियों से खिलवाड़ एक इतना बड़ा अपराध है कि यह क्षमा के योग्य नहीं है। ग्लानि की भावना घेर लेती है युवाओं को? जब उनके उम्र बच्चे कमाने लगते हैं, तब ये अभी भी पढ़ाई कर रहे होते हैं। घर से दूर, अपने समय के परिवर्तन के लिए मेहनत करते हैं। पिता जिसकी उम्र आराम करने की होती है , अभी तक ज़िम्मेदारी का बोझ उठाए है, इस उम्मीद में कि बच्चे एक दिन सुख का सूरज उगाएंगे , परिवार की किस्मत बदलेगा। लेकिन जब इतने संघर्षों के बाद भी व्यवस्था उनके साथ अन्याय करती है , तो ये सिर्फ एक अवसर की हत्या नहीं, एक जीवन की हत्या होती है। कितनी ही उम्मीदों का गला घोंट दिया आपने, शासन व्यवस्था! क्या इसका कोई हिसाब है आपके पास? कितने बच्चों के भविष्य की लाशें आपके सिस्टम पर बोझ बनकर पड़ी हैं? शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार SSC Scam तानों की चोट भी सहते हैं ये बेबस युवा — हम सामाजिक स्तर पर इसे "अन्याय" कहकर आगे बढ़ जाते हैं, पर एक अ...

यह आर्थिक युद्ध हैं! काशी की धरती से स्वदेशी का संदेश: प्रधानमंत्री मोदी

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 हमें अपने भारत को जीताना है और हम जीतेंगे!  यह आर्थिक युद्ध हैं   हम स्वदेशी ही ख़रीदेंगे! आज से हर नया सामान स्वदेशी होगा! स्वदेशी से घर सजाएंगे! स्वदेशी से सेहत बनाएंगे! स्वदेशी ही अपनाएंगे! 🟠 आपका अगला सामान – स्वदेशी होगा या विदेशी??? Made in India ,  भारत बनाम अमेरिका आर्थिक युद्ध 2025 भारत आज केवल एक देश नहीं, बल्कि एक वैश्विक आर्थिक शक्ति बनकर उभर रहा है। और जब दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका भारत को "Dead Economy" कहता है, तब यह केवल बयान नहीं, बल्कि भारत की तेज़ प्रगति से उपजी बौखलाहट है। 🧭  मोदी का आर्थिक शस्त्र: 'स्वदेशी अपनाओ, स्वदेशी खरीदो' प्रधानमंत्री मोदी ने जो "आर्थिक शस्त्र" प्रस्तुत किया है, वह सटीक और समय की मांग है: हर खरीदारी करते समय जाँचें कि वह उत्पाद भारत में बना है या नहीं। विदेशी कंपनियों की बजाय स्थानीय निर्माताओं को प्राथमिकता दें। छोटे उद्योगों, कारीगरों और MSMEs को समर्थन दें। 🌍 अमेरिका / भारत: आर्थिक तुलना बिंदु भारत अमेरिका GDP विकास दर भारत 7.2% (दुनिया की सबसे तेज़) अमेरिका 2.1% (धीमी होती...