मंदिरों पर सवाल उठाना उचित ही तो है
आज जब भी कोई मंदिरों की व्यवस्था, सुरक्षा या उनकी सामाजिक भूमिका पर सवाल उठाता है, तो अक्सर उसे धर्म-विरोधी समझ लिया जाता है। लेकिन क्या वास्तव में मंदिरों पर प्रश्न उठाना गलत है? मेरा मानना है कि नहीं। यदि प्रश्न सुधार की भावना से पूछे जाएँ, तो वे किसी भी संस्था को बेहतर बनाने का माध्यम बनते हैं। मंदिर हमारी आस्था का केंद्र हैं। करोड़ों लोगों की भावनाएँ उनसे जुड़ी हैं। इसलिए यदि वहाँ चोरी होती है, अपराध होते हैं या अव्यवस्था दिखाई देती है, तो उस पर चर्चा होना स्वाभाविक है। शिक्षा कमजोर होगी तो समाज भी कमजोर होगा यदि समाज की शिक्षा मजबूत नहीं होगी, तो उसका प्रभाव हर संस्था पर दिखाई देगा। मंदिर भी इससे अछूते नहीं रहेंगे। हम समय-समय पर समाचारों में देखते हैं कि कहीं मंदिर की दानपेटी चोरी हो गई, कहीं भगवान का मुकुट गायब हो गया, कहीं मूर्ति के आभूषण चोरी हो गए, तो कहीं धातु की पूरी मूर्ति ही चोरी हो गई। हाल के वर्षों में श्रीराम मंदिर अयोध्या, नलखेड़ा बगलामुखी माता मंदिर तथा चारधाम के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम जैसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों से जुड़ी चोरी की घटनाएँ भी होंगी। यही नहीं, कई बार मं...