प्रेमानंद जी हों या रामभद्राचार्य जी, दोनों ही गुरु भगवान के स्वरूप हैं। श्री इन्द्रेश जी की वाणी कीचड़ में खिले कमल की तरह मन को छू गई।
गुरु का सम्मान: इन्द्रेश जी उपाध्याय का संदेश हाल ही में प्रेमानंद जी महाराज और जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी को लेकर समाज में अनावश्यक चर्चाएँ और तुलना होने लगीं। जहाँ मीडिया ने अपनी संकिर्ण मानसिकता , अधूरा व स्थूल ज्ञान और TRP की लालसा में इस विषय को लेकर बड़ी कंट्रोवर्सी खड़ी कर दी, वहीं लगातार 3–4 दिनों तक इस मुद्दे को सनसनी की तरह प्रस्तुत किया गया। वृंदावन के एक संत की वाणी कीचड़ में खिले कमल की तरह मन को छू गई। लेकिन ठीक उसी समय वृंदावन के कथावाचक पूज्य श्री इन्द्रेश जी उपाध्याय महाराज ने एक ऐसा गंभीर, गहन और मन को छू लेने वाला संदेश दिया, जिसने विवाद की दिशा ही बदल दी। 🕉️ दोनों गुरु भगवत् स्वरूप हैं किसी भक्त के पूछने पर इन्द्रेश जी ने कहा — “प्रेमानंद जी हों या रामभद्राचार्य जी, दोनों ही गुरु भगवान के स्वरूप हैं। उनमें किसी भी प्रकार की तुलना करना या अंतर ढूँढ़ना गलत है। यह तो भगवान की लीला है, जो गुरु के माध्यम से प्रकट होती है। वे स्वयं श्रीकृष्ण ही विभिन्न रूपों में लीला कर रहे हैं। दोनों गुरु कृष्णस्वरूप हैं — अब उनमें कौन महान है और कौन गलत, इसका न...