इसी तरह हमें सोचना चाहिए कि हमारा लाभ किसमें हो सकता है।
समाज की वर्तमान स्थिति और अवसर
1. समाज की स्थिति
ये सच है कि हमारी समाज का हाल बेहाल है इस समय।
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न तो मेल-मिलाप है और ना ही प्रगति।
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समाज का बड़ा वर्ग इसमें शामिल नहीं हो रहा है।
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हमारे सामाजिक संगठन में पद की प्रधानता है।
निसंदेह, जो कार्यकर्ता सदस्य हैं, वे अच्छा कार्य कर रहे हैं अपने स्तर पर। वे अपनी पूरी ऊर्जा के साथ, यहाँ तक कि अपना पारिवारिक काम छोड़कर भी सामाजिक हित में काम कर रहे हैं।
वर्तमान अध्यक्ष आदरणीय राहुल सिंह उमठ जी बहुत अच्छे, सरल स्वभाव के और मिलनसार व्यक्ति हैं। बाकी लोग भी अच्छा कर रहे हैं।
लेकिन हमें एक बात का विचार ज़रूर करना चाहिए कि —
अभी फिलहाल हमारे समाज के हालात क्या हैं?
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पिछले 3 सालों से हमारे सम्मेलन होना बंद हो गए हैं।
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हमारे पास धर्मशाला नहीं है।
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जो है, वो अच्छी जगह पर नहीं है।
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एक छोटा-सा कार्यक्रम भी किराए के गार्डन लेकर करना पड़ता है।
| rajput sangthan |
2. वर्तमान सत्ता की स्थिति
आज उज्जैन के व्यक्ति डॉ. मोहन यादव जी मुख्यमंत्री हैं और आशा है कि आने वाले 7-8 साल और रहेंगे।
अब सिंहस्थ आ रहा है।
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उज्जैन में बहुत सारे निर्माण कार्य होंगे और शुरू भी हो चुके हैं।
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इस बार का सिंहस्थ ज़्यादा भव्य और विकासवान होगा क्योंकि मुख्यमंत्री इसी शहर के हैं।
3. समाज के लिए अवसर
निसंदेह, हमारी पारिवारिक या व्यक्तिगत स्तर पर लड़ाई हो सकती है या मनमुटाव हो सकते हैं।
लेकिन जब ऊपरी बात आ जाती है, तो हमें अंदर की बात को किनारे रख देना चाहिए।
जैसे देश में लोग या विपक्ष सरकार से लड़ते हैं, लेकिन जब किसी दूसरे देश से लड़ाई होती है तो सब अपने देश की सरकार के साथ खड़े हो जाते हैं।
इसी तरह हमें सोचना चाहिए कि हमारा लाभ किसमें हो सकता है।
हम सब जानते हैं कि हमारी समाज के दो पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंह गेहलोत और सुमेर सिंह सोलंकी की वर्तमान सरकार में अच्छी पकड़ है और सत्ता से बेहतर मित्रवत व्यवहार भी है।
संभव है कि आने वाले कुछ साल हमारे लिए बेहतर साबित हों!
इसलिए इन दोनों को फिर से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाने का विचार करना चाहिए।
और बनाना भी चाहिए — कम से कम तब तक, जब तक मोहन यादव जी मुख्यमंत्री रहें।
निष्कर्ष
अगर राजनीति में इतनी पकड़ रखने वाले लोग अभी कुछ समय और भार संभालेंगे, तो हमारी समाज लाइम लाइट में भी आएगी।
ये बात सब मानते हैं और विश्वास भी है कि —
👉 हमारी समाज की स्थिति अब से और बेहतर होगी।
हमें अपने लाभ के लिए सोचकर कुछ निर्णय ज़रूर लेने चाहिए, वरना आने वाली पीढ़ियाँ यही कहेंगी — “क्या किया था इन्होंने?”
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