श्री कृष्ण वाहिनी एवं स्वधर्म प्रचारक संस्था’ के संस्थापक पंडित राजेश जी उपाध्याय द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के निमित्त एक भव्य महायज्ञ का आयोजन किया गया।
चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर ग्राम लाखाखेड़ी उमठ में भगवान श्रीकृष्ण के निमित्त एक भव्य महायज्ञ का आयोजन किया गया। लेकिन इस आयोजन की सबसे विशेष बात हैं इसके मार्गदर्शक पंडित श्री राजेश जी उपाध्याय और उनके निसवार्थ मानवहितमें किए जा रहे कार्य।
पंडित राजेश जी उपाध्याय, जो ग्राम लाखाखेड़ी के एक गृहस्थ संत हैं, ‘श्री कृष्ण वाहिनी एवं स्वधर्म प्रचारक संस्था’ के संस्थापक भी हैं। वे अपने इस संगठन के माध्यम से लोगो में कर्तव्य आधारित जीवनशैली को स्थापित करने का सतत प्रयास कर रहे हैं।
यहां धर्म का अर्थ किसी वर्ग विशेष से नहीं, बल्कि “कर्तव्य” से है। स्वधर्म का सीधा अर्थ है—राष्ट्र के प्रति कर्तव्य, परिवार के प्रति जिम्मेदारी, तथा गुरु, माता-पिता और समाज के प्रति अपने उचित दायित्वों का पालन करना।
पंडित उपाध्याय जी का मानना है कि यदि व्यक्ति अपने स्वधर्म को समझकर उसका पालन करे, तो समाज में स्वतः ही संतुलन और शांति स्थापित हो सकती है। साथ ही वे वेदों पर आधारित जीवनशैली को अपनाने पर विशेष जोर देते हैं। वे तंत्र-मंत्र, टोने-टोटके जैसी अंधविश्वासी धारणाओं से दूर रहने की सलाह देते हैं और शुद्ध सात्विक वैदिक पद्धति के माध्यम से लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य करते हैं।
उनके आश्रम में प्रत्येक एकादशी को नियमित सत्संग का आयोजन होता है, जिसमें आसपास के 10 से 12 गांवों के लोग बड़ी संख्या में भाग लेते हैं। इन सत्संगों के माध्यम से वे लोगों को जीवन के वास्तविक मूल्यों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करते हैं।
वे विशेष रूप से जनेऊ के माध्यम से पवित्रता और पितृ तर्पण के महत्व पर जोर देते हैं, जिन्हें वे संतुलित और सुखी जीवन का आधार मानते हैं। साथ ही, वे पूर्णतः वैदिक सिद्धांतों के आधार पर लोगों की समस्याओं का समाधान करते हैं।
इन्हीं लोककल्याणकारी कार्यों की श्रृंखला में भगवान श्रीकृष्ण के निमित्त इस महायज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें 12500 आहुतियां इष्टदेव भगवान श्रीकृष्ण महामंत्र के साथ दशमांश सहित लगभग 21000 आहुतियां अर्पित की गईं।
यज्ञ के दौरान नियमों और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे आयोजन की गरिमा और आध्यात्मिकता बनी रही।
कुल मिलाकर, पंडित राजेश जी उपाध्याय न केवल एक धार्मिक गुरु के रूप में, बल्कि समाज को कर्तव्य, स्वधर्म और वैदिक जीवनशैली की सही दिशा देने वाले एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में उभरकर सामने आ रहे हैं।
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